Panchang

शुभ घड़ियां

अभिजित् मुहूर्त 12:02 - 12:56
अमृत काल 19:37 - 21:19
आनंदादि योग उत्पात
समाप्ति काल 29:02+
तमिल योग मरण
समाप्ति काल 29:02+
होमाहुति शनि के मुख में
भद्रावास -
अग्निवास पाताल में
समाप्ति काल 28:54+

शुभ घड़ियों का महत्व

शुभ घड़ी में किसी भी कार्य का प्रारम्भ करने से उस कार्य का उत्तम फल-परिणाम प्राप्त होता है । इसी भांति अशुभ घड़ी में कार्यों का सम्पादन किये जाने पर अत्यधिक धन- बल- परिश्रम- समय को प्रयुक्त करने के पश्चात् भी वांछित परिणामों की प्राप्ति नहीं हो पाती है । कुछ कार्य ऐसे आवश्यक हो जाते हैं जिनके लिए शुभ मुहूर्त शोधन हेतु कुछ दिन आदि की प्रतीक्षा करना असंभव सा हो जाता है, इसी आवश्यकता को पहचान कर मुहूर्त शास्त्रों के रचयिता विद्वानों ने अभिजित् काल – अमृत काल आदि की संरचना की है, प्रतिदिन की इस निश्चित समयावधि में कार्य शुरू करने के लिए ताराबल – चन्द्रबल – तिथि – पक्ष आदि का विचार करने की आवश्यकता नहीं होती । इन घड़ियों में कार्य की शुरुआत किये जाने पर श्रेष्ठ मुहूर्त की भांति ही शुभ फल की प्राप्ति होती है ।

इसके अलावा इस प्रकरण में इस दिन विशेष में हवन करने से वह आहुतियां किस ग्रह विशेष के मुख में जाएंगी । अग्नि का वास कहाँ है, क्या यह दिन हवन करने के योग्य है या नहीं, इस की भी जानकारी इसी प्रकरण से आपको प्राप्त हो रही है । पृथ्वी पर जिस दिन अग्नि का वास हो उस दिन हवन करने से मनोरथ सिद्ध होते हैं, देव कृपा प्राप्त होती है ।

स्वर्ग में अग्निवास हो और हवन किया जायें तो प्राणनाशक माना गया है । पाताल में अग्निवास के दिन यज्ञ करने से धन का नाश होता है ।

इसी तरह भद्रा विचार भी इसी “शुभ घड़ियां” प्रकरण से आप प्राप्त कर सकते हैं । 

दिन का चौघडिया

05:47 - 07:27
उद्वेग वेला
07:27 - 09:08
चर वेला
09:08 - 10:49
लाभ वेला
10:49 - 12:29
अमृत वेला
Vaar Vela
12:29 - 14:10
काल वेला
Kaal Vela
14:10 - 15:51
शुभ वेला
15:51 - 17:31
रोग वेला
17:31 - 19:12
उद्वेग वेला

रात का चौघडिया

19:12 - 20:31
शुभ वेला
20:31 - 21:51
अमृत वेला
21:51 - 23:10
चर वेला
23:10 -24:29+
रोग वेला
24:29+ -25:49+
काल वेला
25:49+ -27:08+
लाभ वेला
काल रात्री
27:08+ -28:27+
उद्वेग वेला
28:27+ -29:47+
शुभ वेला

चौघड़ियाँ एवं उनके शुभाशुभ फल

चौघड़ियाँ एवं उनके शुभाशुभ फल ज्योतिष शास्त्र के मुहूर्त एवं काल प्रकरण में दिन और रात्री की आठ-आठ चौघड़ियों में विभाजित किया गया है जिसमें से कुछ शुभ तथा कुछ अशुभ चौघड़ियां हैं ।

लाभ – अमृत – शुभ आदि वेलाएं शुभ मानी गयी हैं और उद्वेग – काल – रोग- चर आदि वेलाओं में किये गए कार्यों की परिणति इनके नाम अनुसार ही अशुभ फल प्रदान करती हैं । अतः कल्याण की चाहना रखने वाले मनुष्यों को शुभ आदि पवित्र वेलाओं में ही कार्यों का सम्पादन करना चाहिए । 

05:46 - 07:23 शुभ मुहूर्त
07:23 - 09:39 चौर पंचक
09:39 - 11:51 शुभ मुहूर्त
11:51 - 14:01 रोग पंचक
14:01 - 16:16 शुभ मुहूर्त
16:16 - 18:32 मृत्यु पंचक
18:32 - 20:37 अग्नि पंचक
20:37 - 22:24 शुभ मुहूर्त
22:24 - 23:57 रजः पंचक
23:57 - 25:27+ शुभ मुहूर्त
25:27+ - 27:07+ शुभ मुहूर्त
27:07+ - 28:54+ रजः पंचक
28:54+ - 29:02+ शुभ मुहूर्त
29:02+ - 29:05+ चौर पंचक
29:05+ - 29:46+ शुभ मुहूर्त

संसार में यदि कोई सर्वशक्तिमान और हस्तक्षेप रहित वस्तु है तो वह समय है । यह समय हमारे जीवन में कभी अच्छा तो कभी बुरा सिद्ध होता है । इसी भांति प्रत्येक दिन का कुछ समय नकारात्मक ऊर्जाओं को उत्पन्न करने वाला तो कुछ हिस्सा इसी समय का दोष रहित और सकारात्मक ऊर्जाओं से परिपूर्ण होता है । शास्त्रकारों ने अपने अनुभव के बल पर पाया कि समय का यह पंचक काल अपने नाम कि भांति ही रोग- हानी- व्यथा- दुख आदि को उत्पन्न करता है और इसी तरह शुभ मुहूर्त का समय हमारे कार्यों में अनुकूलताएं लेकर आता है ।

अतः आप भी अपनी दिनचर्या में इन पंचक रहित मुहूर्तों का समावेश करके कम ऊर्जा में श्रेष्ठ फलों को प्राप्त करें । 

शुभ चंद्रबल

Good Chandrabalam till 22:34 for:
मेष, वृष, सिंह,
तुला, धनु, मकर

*Ashtama Chandra For मीन Rashi Borns
Good Chandrabalam till Next Day Sunrise for:
वृष, मिथुन, कन्या,
वृश्चिक, मकर, कुम्भ

*Ashtama Chandra For मेष Rashi Borns

चंद्रबल और उसका महत्व

हमारे पृथ्वी और हमारे जीवन सबसे करीब का ग्रह है चंद्रमा, इसी से हमारे नाम- कर्म- स्वभाव और शुभाशुभ कर्मों और हमारी मानसिक स्थिति का निरधारण होता है । चंद्रमा हमारे नाम या जन्मराशी से चौथा- आठवां- बारहवां होने पर दुख- बाधा और मानसिक व्यथा को उत्पन्न करता है । ठीक इसी प्रकार कुछ स्थितियों में सदैव सहायक और कार्यसाधक होता है । उपरोक्त तालिका से हमें ये सरलता से ज्ञात होता है कि किन राशीवालों के लिए चंद्रमा कि स्थिति अनुकूल है किनके लिए प्रतिकूल....... बहुत ही उपयोगी और सभी मुहूर्तों का आधारभूत विषय I 

ताराबल

Good Tarabalam till29:02+ for:
भरणी, रोहिणी, आर्द्रा,
पुष्य, आश्लेषा, पू०फा०,
हस्त, स्वाति, अनुराधा,
ज्येष्ठा, पू०षा०, श्रवण,
शतभिषा, उ०भा०, रेवती

Good Tarabalam till Next Day Sunrise for:
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा,
पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा,
उ०फा०, चित्रा, विशाखा,
ज्येष्ठा, मूल, उ०षा०,
धनिष्ठा, पू०भा०, रेवती

ताराबल और उसका महत्व

तारा अर्थात् नक्षत्र.... हमारा जीवन किसी निश्चित् तारा के प्रभाव में अर्थात् नक्षत्र में हुआ है । नक्षत्रों कि संख्या 27 है । इन नक्षत्रों के मध्य भी एक अच्छा और बुरा संबंध है । उपरोक्त तालिका से हमें यह मालूम होता है कि वह दिन विशेष किन नक्षत्रवालों के लिए शुभ है किनके लिए नहीं हैं । इसी नक्षत्र के शुभाशुभ बल को शास्त्र में ताराबल कहा गया है । जीवन के प्रत्येक जरूरी कार्यों जैसे मुंडन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत, विवाह, गृहारंभ, प्रवेश, राज्याभिषेक, व्यापार प्रारम्भ आदि में ताराबाल कि नितांत रूप से आवश्यकता शास्त्रों नें बताई है ताकि जीवन में शुभत्व का संचरण होकर दैवी कृपा सहायक हो, सूक्ष्मता में विशालता का समावेश हो । 

शूल और निवास

दिशा शूल पश्चिम में
राहुकाल वास उत्तर में
नक्षत्र शूल नहीं है
चन्द्र वास पश्चिम में
उत्तर में
प्रारंभ काल 22:34

क्यों विचारें शूल

चंद्रमा कि स्थिति अनुसार यात्रा हेतु कुछ निश्चित दिशाएं अत्यंत प्रतिकूल होती हैं । अर्थात् जिस दिन जिस दिशा में शूल हो उस दिन कोई बड़ी यात्रा या स्थान परिवर्तन नहीं करना चाहिए । क्योंकि उस दिशा में प्रतिकूल ऊर्जापुंज का वास होने से दुख और असहजता कि वृद्धि होती है । 

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