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संवत् 2055 मार्गशीर्ष पूर्णिमा, दत्तात्रेय जयंती, गुरुवार 03-12-1998 से स्थापित मधुसूदन ज्योतिष एवं प्राच्यविद्या संस्थान ज्योतिष, अध्यात्म, मन्त्र-तन्त्र के क्षेत्र में साधारण जनमानस को श्रेष्ठतम सेवायें देने में कटिबद्ध एक श्रेष्ठतम संस्थान है, जिसके माध्यम से लाखों लोग लाभान्वित होते रहे हैं I

छल, कपटपूर्ण व्यावसायिकता से दूर विशुद्ध भाव से प्रेरित होकर श्री गीता जी के कर्म सिद्धान्त का प्रतिपादन करते हुए आपको जीवन के हर कठिन क्षण में, ऊहापोह की स्थिति में, जीवन के सन्तान प्राप्ति से लेकर विद्या, व्यवसाय, नौकरी, रोग-कष्ट मुक्ति, ग्रहदोष- शत्रुदोष- पितृदोष आदि का शास्त्रोक्त निवारण करते हुए संस्थान ‘पं० लक्ष्मीनारायण शास्त्री जी’ की अध्यक्षता में अपनी सेवायें प्रदान करता है I

इस संस्थान के मूलवाक्य हैं

Empowering You To Be Highest Self Now अर्थात् आप अपने भाग्यबल, बुद्धिबल, कर्मबल, दैवबल, मन्त्रबल आदि के योग से जहां तक अधिकतम पहुंच सकते हैं वहां तक आपको ले चलें, इस लक्ष्य तक पहुंचने में आने वाली बाधाओं को दूर करें I

और

‘आओ चलें सुख की ओर’ अर्थात् सबका जीवन सुख से, आरोग्य से, धन से, सन्तान से अर्थात् सब ओर परिपूर्ण हो I

इसके बावजूद संस्थान की विशेषता ये है कि उच्चतम क्वालिटी की सेवाओं को साधारण शुल्क में उपलब्ध कराना ताकि आम आदमी भी अपने जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकें I

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया I

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग भवेत् II

और इसी कल्याणमयी सद्भावना और प्रयास को आगे बढाने के लिए साथ ही जन-जन के हाथ में विशुद्ध ज्योतिषीय गणनाओं को प्रदान करने के लिए “मधुसुदन ज्योतिष एवं प्राच्यविद्या संस्थान प्रस्तुत करते हैं

आपका परम मित्र और एक मन्त्र उन्नति का, समृद्धि का और सफलता का...

Astro Sandesh

30 नवम्बर 2017 आज मार्गशीर्ष महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि, रेवती नक्षत्र, व्यतिपात योग, विष्टि करण और दिन गुरुवार है I आज मोक्षदा एकादशी व्रत, श्रीगीता जयंती एवं अखण्ड द्वादशी है I आज मोक्षदा एकादशी का बड़ा ही पावन और श्रेष्ठ दिन आज गीता जयंती है आज के दिन श्री कृष्ण भगवान् ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था. तो आइये आज के इस श्रेष्ठ दिन में पीले पुष्प और तुलसी पत्र भगवान् कान्हाजी के चरणों में अर्पित करें और घर में श्री मद्भाग्वद गीता जी की पुस्तक पर भी फूल चढ़ाएं और धूप- दीप दिखाएँ. संभव हो तो आज के दिन अधिक से अधिक गीता जी का पाठ करें और यदि पाठ कर पाना संभव न हो तो इस मन्त्र का आवश्य पाठ करें इसमें अर्जुन से अपने सारे बुद्धि विवेक को छोटा मानकर प्रभु के चरणों में अपने को पूर्ण समर्पित करके उनके शिष्य बन गए उसके बाद ही भगवान् श्री कृष्ण ने उन्हें गीता जी का अमूल्य ज्ञान दिया. कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः । यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्‌ ॥ आज इस श्रेष्ठ मन्त्र के पाठ से भगवान् श्री कृष्ण आपके द्वारा किये गए हर शुभ कर्म में आपके साथ होंगे और आपका जीवन सुखों और कल्याण की ओर अग्रसर होगा. साथ ही आज अखण्ड द्वादशी भी है अतः आज के दिन 1 फूल और किसी भी साबुत अन्न के 12 दानें भगवान् श्री कृष्ण या श्री विष्णु जी के चरणों में चढ़ायें और पायें अखण्ड सुख, अखण्ड शांति और अखण्ड संपदा. ...

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आपके आज को श्रेष्ठ बनाने की पूजा-विधि