Panchang

शुभ घड़ियां

अभिजित् मुहूर्त नहीं है
अमृत काल 14:08 - 15:51
आनंदादि योग कालदंड
समाप्ति काल 20:59
तमिल योग मरण
समाप्ति काल 20:59
होमाहुति राहू के मुख में
समाप्ति काल 20:59
भद्रावास -
अग्निवास पृथ्वी में

शुभ घड़ियों का महत्व

शुभ घड़ी में किसी भी कार्य का प्रारम्भ करने से उस कार्य का उत्तम फल-परिणाम प्राप्त होता है । इसी भांति अशुभ घड़ी में कार्यों का सम्पादन किये जाने पर अत्यधिक धन- बल- परिश्रम- समय को प्रयुक्त करने के पश्चात् भी वांछित परिणामों की प्राप्ति नहीं हो पाती है । कुछ कार्य ऐसे आवश्यक हो जाते हैं जिनके लिए शुभ मुहूर्त शोधन हेतु कुछ दिन आदि की प्रतीक्षा करना असंभव सा हो जाता है, इसी आवश्यकता को पहचान कर मुहूर्त शास्त्रों के रचयिता विद्वानों ने अभिजित् काल – अमृत काल आदि की संरचना की है, प्रतिदिन की इस निश्चित समयावधि में कार्य शुरू करने के लिए ताराबल – चन्द्रबल – तिथि – पक्ष आदि का विचार करने की आवश्यकता नहीं होती । इन घड़ियों में कार्य की शुरुआत किये जाने पर श्रेष्ठ मुहूर्त की भांति ही शुभ फल की प्राप्ति होती है ।

इसके अलावा इस प्रकरण में इस दिन विशेष में हवन करने से वह आहुतियां किस ग्रह विशेष के मुख में जाएंगी । अग्नि का वास कहाँ है, क्या यह दिन हवन करने के योग्य है या नहीं, इस की भी जानकारी इसी प्रकरण से आपको प्राप्त हो रही है । पृथ्वी पर जिस दिन अग्नि का वास हो उस दिन हवन करने से मनोरथ सिद्ध होते हैं, देव कृपा प्राप्त होती है ।

स्वर्ग में अग्निवास हो और हवन किया जायें तो प्राणनाशक माना गया है । पाताल में अग्निवास के दिन यज्ञ करने से धन का नाश होता है ।

इसी तरह भद्रा विचार भी इसी “शुभ घड़ियां” प्रकरण से आप प्राप्त कर सकते हैं । 

07:03 - 08:23
लाभ वेला
08:23 - 09:42
अमृत वेला
09:42 - 11:02
काल वेला
Kaal Vela
11:02 - 12:21
शुभ वेला
12:21 - 13:41
रोग वेला
Vaar Vela
13:41 - 15:00
उद्वेग वेला
15:00 - 16:20
चर वेला
16:20 - 17:39
लाभ वेला
17:39 - 19:20
उद्वेग वेला
19:20 - 21:00
शुभ वेला
21:00 - 22:41
अमृत वेला
22:41 -24:21+
चर वेला
24:21+ -26:02+
रोग वेला
26:02+ -27:43+
काल वेला
27:43+ -29:23+
लाभ वेला
काल रात्री
29:23+ -31:04+
उद्वेग वेला

चौघड़ियाँ एवं उनके शुभाशुभ फल ज्योतिष शास्त्र के मुहूर्त एवं काल प्रकरण में दिन और रात्री की आठ-आठ चौघड़ियों में विभाजित किया गया है जिसमें से कुछ शुभ तथा कुछ अशुभ चौघड़ियां हैं ।

लाभ – अमृत – शुभ आदि वेलाएं शुभ मानी गयी हैं और उद्वेग – काल – रोग- चर आदि वेलाओं में किये गए कार्यों की परिणति इनके नाम अनुसार ही अशुभ फल प्रदान करती हैं । अतः कल्याण की चाहना रखने वाले मनुष्यों को शुभ आदि पवित्र वेलाओं में ही कार्यों का सम्पादन करना चाहिए । 

पंचक रहित मुहूर्त

07:03 - 07:15 शुभ मुहूर्त
07:15 - 09:20 रोग पंचक
09:20 - 11:06 शुभ मुहूर्त
11:06 - 12:39 मृत्यु पंचक
12:39 - 14:10 अग्नि पंचक
14:10 - 15:50 शुभ मुहूर्त
15:50 - 17:48 मृत्यु पंचक
17:48 - 20:01 अग्नि पंचक
20:01 - 20:59 शुभ मुहूर्त
20:59 - 22:17 रजः पंचक
22:17 - 24:29+ शुभ मुहूर्त
24:29+ - 26:40+ चौर पंचक
26:40+ - 27:25+ शुभ मुहूर्त
27:25+ - 28:55+ रोग पंचक
28:55+ - 31:03+ शुभ मुहूर्त

क्यों चुनें पंचक रहित मुहूर्त

संसार में यदि कोई सर्वशक्तिमान और हस्तक्षेप रहित वस्तु है तो वह समय है । यह समय हमारे जीवन में कभी अच्छा तो कभी बुरा सिद्ध होता है । इसी भांति प्रत्येक दिन का कुछ समय नकारात्मक ऊर्जाओं को उत्पन्न करने वाला तो कुछ हिस्सा इसी समय का दोष रहित और सकारात्मक ऊर्जाओं से परिपूर्ण होता है । शास्त्रकारों ने अपने अनुभव के बल पर पाया कि समय का यह पंचक काल अपने नाम कि भांति ही रोग- हानी- व्यथा- दुख आदि को उत्पन्न करता है और इसी तरह शुभ मुहूर्त का समय हमारे कार्यों में अनुकूलताएं लेकर आता है ।

अतः आप भी अपनी दिनचर्या में इन पंचक रहित मुहूर्तों का समावेश करके कम ऊर्जा में श्रेष्ठ फलों को प्राप्त करें । 

शुभ चंद्रबल

Good Chandrabalam till 08:05 for:
मेष, कर्क, कन्या,
वृश्चिक, धनु, मीन

*Ashtama Chandra For कुम्भ Rashi Borns
Good Chandrabalam till Next Day Sunrise for:
मेष, वृष, सिंह,
तुला, धनु, मकर

*Ashtama Chandra For मीन Rashi Borns

चंद्रबल और उसका महत्व

हमारे पृथ्वी और हमारे जीवन सबसे करीब का ग्रह है चंद्रमा, इसी से हमारे नाम- कर्म- स्वभाव और शुभाशुभ कर्मों और हमारी मानसिक स्थिति का निरधारण होता है । चंद्रमा हमारे नाम या जन्मराशी से चौथा- आठवां- बारहवां होने पर दुख- बाधा और मानसिक व्यथा को उत्पन्न करता है । ठीक इसी प्रकार कुछ स्थितियों में सदैव सहायक और कार्यसाधक होता है । उपरोक्त तालिका से हमें ये सरलता से ज्ञात होता है कि किन राशीवालों के लिए चंद्रमा कि स्थिति अनुकूल है किनके लिए प्रतिकूल....... बहुत ही उपयोगी और सभी मुहूर्तों का आधारभूत विषय I 

ताराबल

Good Tarabalam till 20:59 for:
भरणी, रोहिणी, आर्द्रा,
पुनर्वसु, आश्लेषा, पू०फा०,
हस्त, स्वाति, विशाखा,
ज्येष्ठा, पू०षा०, श्रवण,
शतभिषा, पू०भा०, रेवती

Good Tarabalam till Next Day Sunrise for:
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा,
पुनर्वसु, पुष्य, मघा,
उ०फा०, चित्रा, विशाखा,
अनुराधा, मूल, उ०षा०,
धनिष्ठा, पू०भा०, उ०भा०

ताराबल और उसका महत्व

तारा अर्थात् नक्षत्र.... हमारा जीवन किसी निश्चित् तारा के प्रभाव में अर्थात् नक्षत्र में हुआ है । नक्षत्रों कि संख्या 27 है । इन नक्षत्रों के मध्य भी एक अच्छा और बुरा संबंध है । उपरोक्त तालिका से हमें यह मालूम होता है कि वह दिन विशेष किन नक्षत्रवालों के लिए शुभ है किनके लिए नहीं हैं । इसी नक्षत्र के शुभाशुभ बल को शास्त्र में ताराबल कहा गया है । जीवन के प्रत्येक जरूरी कार्यों जैसे मुंडन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत, विवाह, गृहारंभ, प्रवेश, राज्याभिषेक, व्यापार प्रारम्भ आदि में ताराबाल कि नितांत रूप से आवश्यकता शास्त्रों नें बताई है ताकि जीवन में शुभत्व का संचरण होकर दैवी कृपा सहायक हो, सूक्ष्मता में विशालता का समावेश हो । 

शूल और निवास

दिशा शूल उत्तर में
राहुकाल वास दक्षिण-पश्चिम में
नक्षत्र शूल नहीं है
चन्द्र वास दक्षिण में
पश्चिम में
प्रारंभ काल 08:05

क्यों विचारें शूल

चंद्रमा कि स्थिति अनुसार यात्रा हेतु कुछ निश्चित दिशाएं अत्यंत प्रतिकूल होती हैं । अर्थात् जिस दिन जिस दिशा में शूल हो उस दिन कोई बड़ी यात्रा या स्थान परिवर्तन नहीं करना चाहिए । क्योंकि उस दिशा में प्रतिकूल ऊर्जापुंज का वास होने से दुख और असहजता कि वृद्धि होती है । 

Astro Sandesh

30 नवम्बर 2017 आज मार्गशीर्ष महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि, रेवती नक्षत्र, व्यतिपात योग, विष्टि करण और दिन गुरुवार है I आज मोक्षदा एकादशी व्रत, श्रीगीता जयंती एवं अखण्ड द्वादशी है I आज मोक्षदा एकादशी का बड़ा ही पावन और श्रेष्ठ दिन आज गीता जयंती है आज के दिन श्री कृष्ण भगवान् ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था. तो आइये आज के इस श्रेष्ठ दिन में पीले पुष्प और तुलसी पत्र भगवान् कान्हाजी के चरणों में अर्पित करें और घर में श्री मद्भाग्वद गीता जी की पुस्तक पर भी फूल चढ़ाएं और धूप- दीप दिखाएँ. संभव हो तो आज के दिन अधिक से अधिक गीता जी का पाठ करें और यदि पाठ कर पाना संभव न हो तो इस मन्त्र का आवश्य पाठ करें इसमें अर्जुन से अपने सारे बुद्धि विवेक को छोटा मानकर प्रभु के चरणों में अपने को पूर्ण समर्पित करके उनके शिष्य बन गए उसके बाद ही भगवान् श्री कृष्ण ने उन्हें गीता जी का अमूल्य ज्ञान दिया. कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः । यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्‌ ॥ आज इस श्रेष्ठ मन्त्र के पाठ से भगवान् श्री कृष्ण आपके द्वारा किये गए हर शुभ कर्म में आपके साथ होंगे और आपका जीवन सुखों और कल्याण की ओर अग्रसर होगा. साथ ही आज अखण्ड द्वादशी भी है अतः आज के दिन 1 फूल और किसी भी साबुत अन्न के 12 दानें भगवान् श्री कृष्ण या श्री विष्णु जी के चरणों में चढ़ायें और पायें अखण्ड सुख, अखण्ड शांति और अखण्ड संपदा. ...

astromyntra

आपके आज को श्रेष्ठ बनाने की पूजा-विधि