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Chandra Yantra

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Chandra Yantra (Yantra For Moon)

The Moon is a feminine vibration and is associated with receptivity, love, intuition, motherhood and the ability to be nurturing. Your Moon takes charge over your mental and emotional balance. A disturbance in your mental or emotional life can result from a weak placement of Moon in your Birth Chart. A weak Moon leads to problems related to water (or bodily fluids), mental and emotional problems such as frequent depressive attacks, over-sensitivity or volatile emotions. The Moon Yantra is the solvent that can dissolve those disturbances in your life.

Moon Yantra soothes the lives of

1.       People who are caught up in the waves of depression.

2.       People who struggle to balance their emotions.

3.       People who strive to heal the strain in relationships.

4.       People who wish for a peaceful life.

5.       People who have difficult relationship with mother or mother-figure.

6.       People who seek to increase intuition.

How to Use

Place the Yantra facing the East or the North in a clean and sacred altar.Do not let other people touch the Yantra.Periodically wash the Yantra with rose water or milk. Then, rinse it with water and wipe it to dry.Place rounded dots of sandalwood paste on the 4 corners and in the center of the Yantra. Light a candle or ghee lamp and an incense stick in front of the Yantra. You can offer fresh or dry fruits as Prasad, as well. Chant the Mantra above in front of the Yantra, preferably after showering.

Mantra: “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः” I 

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Astro Sandesh

30 नवम्बर 2017 आज मार्गशीर्ष महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि, रेवती नक्षत्र, व्यतिपात योग, विष्टि करण और दिन गुरुवार है I आज मोक्षदा एकादशी व्रत, श्रीगीता जयंती एवं अखण्ड द्वादशी है I आज मोक्षदा एकादशी का बड़ा ही पावन और श्रेष्ठ दिन आज गीता जयंती है आज के दिन श्री कृष्ण भगवान् ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था. तो आइये आज के इस श्रेष्ठ दिन में पीले पुष्प और तुलसी पत्र भगवान् कान्हाजी के चरणों में अर्पित करें और घर में श्री मद्भाग्वद गीता जी की पुस्तक पर भी फूल चढ़ाएं और धूप- दीप दिखाएँ. संभव हो तो आज के दिन अधिक से अधिक गीता जी का पाठ करें और यदि पाठ कर पाना संभव न हो तो इस मन्त्र का आवश्य पाठ करें इसमें अर्जुन से अपने सारे बुद्धि विवेक को छोटा मानकर प्रभु के चरणों में अपने को पूर्ण समर्पित करके उनके शिष्य बन गए उसके बाद ही भगवान् श्री कृष्ण ने उन्हें गीता जी का अमूल्य ज्ञान दिया. कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः । यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्‌ ॥ आज इस श्रेष्ठ मन्त्र के पाठ से भगवान् श्री कृष्ण आपके द्वारा किये गए हर शुभ कर्म में आपके साथ होंगे और आपका जीवन सुखों और कल्याण की ओर अग्रसर होगा. साथ ही आज अखण्ड द्वादशी भी है अतः आज के दिन 1 फूल और किसी भी साबुत अन्न के 12 दानें भगवान् श्री कृष्ण या श्री विष्णु जी के चरणों में चढ़ायें और पायें अखण्ड सुख, अखण्ड शांति और अखण्ड संपदा. ...

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आपके आज को श्रेष्ठ बनाने की पूजा-विधि