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Gayatri Yantra

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Gayatri Yantra

Gayatri Yantra represents the Goddess Gayatri. The Goddess has five heads-4 heads depicting the four Vedas and 1 head depicting the Almighty of this Universe. Her Yantra is a sign of auspiciousness and upon worshipping it regularly you will be blessed with good health, wealth, prosperity and peace. The golden grace of the Sun comes through this Goddess. Bright up your inner life with a more cheerful, sunny outlook and truly walk a pathway to enlightenment.

Benefits

1.       Goddess Gayatri will fulfill your spiritual aspirations.

2.       She will bless you with a hassle-free life.

3.       She will illuminate you with healthy new thoughts.

4.       The positive power of the Gayatri Yantra liberates you from negative spirits, bad dreams and souls.

5.       It will strike a balance between your spiritual and material desires to live a harmonious life.

6.       The worship of this yantra provides comforts in this world and a seat in Vishnu lok.

7.       Gayatri Yantra is regarded as a great source of energy that eradicates bad luck and generates good fortune.

8.       When the Gayatri Yantra stays with you, your spiritual interests will come to the fore, paving your way for happiness, peace and prosperity.

How to use

Place the Yantra facing the East or the North in a clean and sacred altar.Do not let other people touch the Yantra. Periodically wash the Yantra with rose water or unboiled milk. Then, rinse it with water and wipe it to dry. Place rounded dots of sandalwood paste on the 4 corners and in the center of the Yantra.
Light a candle or ghee lamp and an incense stick in front of the Yantra. You can offer fresh or dry fruits as Prasad, as well.

Mantra:  “ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्” II

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30 नवम्बर 2017 आज मार्गशीर्ष महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि, रेवती नक्षत्र, व्यतिपात योग, विष्टि करण और दिन गुरुवार है I आज मोक्षदा एकादशी व्रत, श्रीगीता जयंती एवं अखण्ड द्वादशी है I आज मोक्षदा एकादशी का बड़ा ही पावन और श्रेष्ठ दिन आज गीता जयंती है आज के दिन श्री कृष्ण भगवान् ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था. तो आइये आज के इस श्रेष्ठ दिन में पीले पुष्प और तुलसी पत्र भगवान् कान्हाजी के चरणों में अर्पित करें और घर में श्री मद्भाग्वद गीता जी की पुस्तक पर भी फूल चढ़ाएं और धूप- दीप दिखाएँ. संभव हो तो आज के दिन अधिक से अधिक गीता जी का पाठ करें और यदि पाठ कर पाना संभव न हो तो इस मन्त्र का आवश्य पाठ करें इसमें अर्जुन से अपने सारे बुद्धि विवेक को छोटा मानकर प्रभु के चरणों में अपने को पूर्ण समर्पित करके उनके शिष्य बन गए उसके बाद ही भगवान् श्री कृष्ण ने उन्हें गीता जी का अमूल्य ज्ञान दिया. कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः । यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्‌ ॥ आज इस श्रेष्ठ मन्त्र के पाठ से भगवान् श्री कृष्ण आपके द्वारा किये गए हर शुभ कर्म में आपके साथ होंगे और आपका जीवन सुखों और कल्याण की ओर अग्रसर होगा. साथ ही आज अखण्ड द्वादशी भी है अतः आज के दिन 1 फूल और किसी भी साबुत अन्न के 12 दानें भगवान् श्री कृष्ण या श्री विष्णु जी के चरणों में चढ़ायें और पायें अखण्ड सुख, अखण्ड शांति और अखण्ड संपदा. ...

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आपके आज को श्रेष्ठ बनाने की पूजा-विधि