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Aakarshan Yantra

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Aakarshan Yantra

Aakarshan Yantra should be installed and woshipped for attracting people in your life. This Yantra has tremendous power for attraction and it highly increases the positive aura around the worshipper so that all those people who are around him / her start liking him / her and feeling good about him / her. This Yantra acts as a powerful talisman which can increase the personal charm of the wearer so that he / she becomes a center of attraction and a likeable person by those who are all around him / her. This Yantra is also said to be very effective in bringing Love & Attraction in a person's life and it is capable of attracting people of opposite sex towards him / her. This Yantra enhances the power of Love & Affection by increasing the energy of mind waves so that they are capable of affecting positively on all the people around him / her. This Yantra can be used to bring back the lost love in your life or for attracting / drawing someone in your life with whom you want to spend your life. It can also be used for attraction and drawing someone in your life.

How to Use : Akarsham Yantra should be established on Friday in the night by bathing it with ganga water or milk/yoghurt and worshipping with incense and lamps. The yantra should be established on a red cloth.

Presiding Diety : Planet Venus 
Day to Establish : Friday
Direction for placing this Yantra : South East

Mantra : "ॐ ह्रीं आकर्षिणी देव्यै नमः I  

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Astro Sandesh

30 नवम्बर 2017 आज मार्गशीर्ष महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि, रेवती नक्षत्र, व्यतिपात योग, विष्टि करण और दिन गुरुवार है I आज मोक्षदा एकादशी व्रत, श्रीगीता जयंती एवं अखण्ड द्वादशी है I आज मोक्षदा एकादशी का बड़ा ही पावन और श्रेष्ठ दिन आज गीता जयंती है आज के दिन श्री कृष्ण भगवान् ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था. तो आइये आज के इस श्रेष्ठ दिन में पीले पुष्प और तुलसी पत्र भगवान् कान्हाजी के चरणों में अर्पित करें और घर में श्री मद्भाग्वद गीता जी की पुस्तक पर भी फूल चढ़ाएं और धूप- दीप दिखाएँ. संभव हो तो आज के दिन अधिक से अधिक गीता जी का पाठ करें और यदि पाठ कर पाना संभव न हो तो इस मन्त्र का आवश्य पाठ करें इसमें अर्जुन से अपने सारे बुद्धि विवेक को छोटा मानकर प्रभु के चरणों में अपने को पूर्ण समर्पित करके उनके शिष्य बन गए उसके बाद ही भगवान् श्री कृष्ण ने उन्हें गीता जी का अमूल्य ज्ञान दिया. कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः । यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्‌ ॥ आज इस श्रेष्ठ मन्त्र के पाठ से भगवान् श्री कृष्ण आपके द्वारा किये गए हर शुभ कर्म में आपके साथ होंगे और आपका जीवन सुखों और कल्याण की ओर अग्रसर होगा. साथ ही आज अखण्ड द्वादशी भी है अतः आज के दिन 1 फूल और किसी भी साबुत अन्न के 12 दानें भगवान् श्री कृष्ण या श्री विष्णु जी के चरणों में चढ़ायें और पायें अखण्ड सुख, अखण्ड शांति और अखण्ड संपदा. ...

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आपके आज को श्रेष्ठ बनाने की पूजा-विधि