Panchang

अभिजित् मुहूर्त नहीं है
अमृत काल 07:51 - 09:24
आनंदादि योग Sthira
समाप्ति काल 14:04
तमिल योग अमृत
समाप्ति काल 14:04
होमाहुति सूर्य के मुख में
भद्रावास -
अग्निवास पृथ्वी में

शुभ घड़ी में किसी भी कार्य का प्रारम्भ करने से उस कार्य का उत्तम फल-परिणाम प्राप्त होता है । इसी भांति अशुभ घड़ी में कार्यों का सम्पादन किये जाने पर अत्यधिक धन- बल- परिश्रम- समय को प्रयुक्त करने के पश्चात् भी वांछित परिणामों की प्राप्ति नहीं हो पाती है । कुछ कार्य ऐसे आवश्यक हो जाते हैं जिनके लिए शुभ मुहूर्त शोधन हेतु कुछ दिन आदि की प्रतीक्षा करना असंभव सा हो जाता है, इसी आवश्यकता को पहचान कर मुहूर्त शास्त्रों के रचयिता विद्वानों ने अभिजित् काल – अमृत काल आदि की संरचना की है, प्रतिदिन की इस निश्चित समयावधि में कार्य शुरू करने के लिए ताराबल – चन्द्रबल – तिथि – पक्ष आदि का विचार करने की आवश्यकता नहीं होती । इन घड़ियों में कार्य की शुरुआत किये जाने पर श्रेष्ठ मुहूर्त की भांति ही शुभ फल की प्राप्ति होती है ।

इसके अलावा इस प्रकरण में इस दिन विशेष में हवन करने से वह आहुतियां किस ग्रह विशेष के मुख में जाएंगी । अग्नि का वास कहाँ है, क्या यह दिन हवन करने के योग्य है या नहीं, इस की भी जानकारी इसी प्रकरण से आपको प्राप्त हो रही है । पृथ्वी पर जिस दिन अग्नि का वास हो उस दिन हवन करने से मनोरथ सिद्ध होते हैं, देव कृपा प्राप्त होती है ।

स्वर्ग में अग्निवास हो और हवन किया जायें तो प्राणनाशक माना गया है । पाताल में अग्निवास के दिन यज्ञ करने से धन का नाश होता है ।

इसी तरह भद्रा विचार भी इसी “शुभ घड़ियां” प्रकरण से आप प्राप्त कर सकते हैं । 

दिन का चौघडिया

06:10 - 07:45
लाभ वेला
07:45 - 09:20
अमृत वेला
09:20 - 10:54
काल वेला
Kaal Vela
10:54 - 12:29
शुभ वेला
12:29 - 14:04
रोग वेला
Vaar Vela
14:04 - 15:39
उद्वेग वेला
15:39 - 17:14
चर वेला
17:14 - 18:49
लाभ वेला

रात का चौघडिया

18:49 - 20:14
उद्वेग वेला
20:14 - 21:39
शुभ वेला
21:39 - 23:04
अमृत वेला
23:04 -24:30+
चर वेला
24:30+ -25:55+
रोग वेला
25:55+ -27:20+
काल वेला
27:20+ -28:45+
लाभ वेला
काल रात्री
28:45+ -30:10+
उद्वेग वेला

चौघड़ियाँ एवं उनके शुभाशुभ फल

चौघड़ियाँ एवं उनके शुभाशुभ फल ज्योतिष शास्त्र के मुहूर्त एवं काल प्रकरण में दिन और रात्री की आठ-आठ चौघड़ियों में विभाजित किया गया है जिसमें से कुछ शुभ तथा कुछ अशुभ चौघड़ियां हैं ।

लाभ – अमृत – शुभ आदि वेलाएं शुभ मानी गयी हैं और उद्वेग – काल – रोग- चर आदि वेलाओं में किये गए कार्यों की परिणति इनके नाम अनुसार ही अशुभ फल प्रदान करती हैं । अतः कल्याण की चाहना रखने वाले मनुष्यों को शुभ आदि पवित्र वेलाओं में ही कार्यों का सम्पादन करना चाहिए । 

पंचक रहित मुहूर्त

06:09 - 07:54 रजः पंचक
07:54 - 10:04 शुभ मुहूर्त
10:04 - 12:19 चौर पंचक
12:19 - 14:04 शुभ मुहूर्त
14:04 - 14:35 रोग पंचक
14:35 - 16:40 शुभ मुहूर्त
16:40 - 18:27 मृत्यु पंचक
18:27 - 20:00 अग्नि पंचक
20:00 - 21:02 शुभ मुहूर्त
21:02 - 21:30 रजः पंचक
21:30 - 23:10 अग्नि पंचक
23:10 - 25:08+ शुभ मुहूर्त
25:08+ - 27:22+ रजः पंचक
27:22+ - 29:38+ शुभ मुहूर्त
29:38+ - 30:10+ चौर पंचक

क्यों चुनें पंचक रहित मुहूर्त

संसार में यदि कोई सर्वशक्तिमान और हस्तक्षेप रहित वस्तु है तो वह समय है । यह समय हमारे जीवन में कभी अच्छा तो कभी बुरा सिद्ध होता है । इसी भांति प्रत्येक दिन का कुछ समय नकारात्मक ऊर्जाओं को उत्पन्न करने वाला तो कुछ हिस्सा इसी समय का दोष रहित और सकारात्मक ऊर्जाओं से परिपूर्ण होता है । शास्त्रकारों ने अपने अनुभव के बल पर पाया कि समय का यह पंचक काल अपने नाम कि भांति ही रोग- हानी- व्यथा- दुख आदि को उत्पन्न करता है और इसी तरह शुभ मुहूर्त का समय हमारे कार्यों में अनुकूलताएं लेकर आता है ।

अतः आप भी अपनी दिनचर्या में इन पंचक रहित मुहूर्तों का समावेश करके कम ऊर्जा में श्रेष्ठ फलों को प्राप्त करें । 

शुभ चंद्रबल

Good Chandrabalam till 20:00 for:
मिथुन, सिंह, तुला,
वृश्चिक, कुम्भ, मीन

*Ashtama Chandra For मकर Rashi Borns
Good Chandrabalam till Next Day Sunrise for:
मेष, कर्क, कन्या,
वृश्चिक, धनु, मीन

*Ashtama Chandra For कुम्भ Rashi Borns

चंद्रबल और उसका महत्व

हमारे पृथ्वी और हमारे जीवन सबसे करीब का ग्रह है चंद्रमा, इसी से हमारे नाम- कर्म- स्वभाव और शुभाशुभ कर्मों और हमारी मानसिक स्थिति का निरधारण होता है । चंद्रमा हमारे नाम या जन्मराशी से चौथा- आठवां- बारहवां होने पर दुख- बाधा और मानसिक व्यथा को उत्पन्न करता है । ठीक इसी प्रकार कुछ स्थितियों में सदैव सहायक और कार्यसाधक होता है । उपरोक्त तालिका से हमें ये सरलता से ज्ञात होता है कि किन राशीवालों के लिए चंद्रमा कि स्थिति अनुकूल है किनके लिए प्रतिकूल....... बहुत ही उपयोगी और सभी मुहूर्तों का आधारभूत विषय I 

ताराबल

Good Tarabalam till 14:04 for:
अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी,
आर्द्रा, पुष्य, मघा,
उ०फा०, हस्त, स्वाति,
अनुराधा, मूल, उ०षा०,
श्रवण, शतभिषा, उ०भा०

Good Tarabalam till Next Day Sunrise for:
भरणी, रोहिणी, मृगशिरा,
पुनर्वसु, आश्लेषा, पू०फा०,
हस्त, चित्रा, विशाखा,
ज्येष्ठा, पू०षा०, श्रवण,
धनिष्ठा, पू०भा०, रेवती

ताराबल और उसका महत्व

तारा अर्थात् नक्षत्र.... हमारा जीवन किसी निश्चित् तारा के प्रभाव में अर्थात् नक्षत्र में हुआ है । नक्षत्रों कि संख्या 27 है । इन नक्षत्रों के मध्य भी एक अच्छा और बुरा संबंध है । उपरोक्त तालिका से हमें यह मालूम होता है कि वह दिन विशेष किन नक्षत्रवालों के लिए शुभ है किनके लिए नहीं हैं । इसी नक्षत्र के शुभाशुभ बल को शास्त्र में ताराबल कहा गया है । जीवन के प्रत्येक जरूरी कार्यों जैसे मुंडन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत, विवाह, गृहारंभ, प्रवेश, राज्याभिषेक, व्यापार प्रारम्भ आदि में ताराबाल कि नितांत रूप से आवश्यकता शास्त्रों नें बताई है ताकि जीवन में शुभत्व का संचरण होकर दैवी कृपा सहायक हो, सूक्ष्मता में विशालता का समावेश हो । 

शूल और निवास

दिशा शूल उत्तर में
राहुकाल वास दक्षिण-पश्चिम में
नक्षत्र शूल उत्तर में
प्रारंभ काल 14:04
चन्द्र वास पूर्व में
दक्षिण में
प्रारंभ काल 20:00

क्यों विचारें शूल

चंद्रमा कि स्थिति अनुसार यात्रा हेतु कुछ निश्चित दिशाएं अत्यंत प्रतिकूल होती हैं । अर्थात् जिस दिन जिस दिशा में शूल हो उस दिन कोई बड़ी यात्रा या स्थान परिवर्तन नहीं करना चाहिए । क्योंकि उस दिशा में प्रतिकूल ऊर्जापुंज का वास होने से दुख और असहजता कि वृद्धि होती है । 

Astro Sandesh

20 अगस्त 2017 आज भाद्रपद महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि, पुष्य नक्षत्र, व्यतिपात योग, विष्टि करण और दिन रविवार है I आज मासशिवरात्रि व्रत, अघोरा-डाकिनी चतुर्दशी और रविपुष्य योग है I आज के दिन इस मन्त्र “ॐ शिवनारायणाय नमः” का 7 बार उच्चारण करें I ऐसा करने से भगवान् शिव और विष्णु जी की कृपा से आपके जीवन में धनाभाव नहीं होगा I आज भगवान् कृष्ण की षष्ठी भी है जितने भी गोप गोपियाँ थी उन्होंने प्रभु को बुरी नज़र न लगे उनका भाग्य अच्छा हो इसलिए षष्ठी का शगुन किया था I जो लोग कान्हाजी में अटूट श्रद्धा और प्रेम रखते हैं वे लोग भगवान् जी के जन्म से लेकर षष्ठी तक उत्सव मानते हैं I आज षष्ठी उत्सव पर आप रात्री को सोने से पहले इस मन्त्र “ॐ बाल मुकुन्दाय नमः” का 108 बार जाप करें I ऐसा करने से आपके बच्चों को सौभाग्य की प्राप्ति होगी और उनके जीवन के कष्ट- दुःख भगवान् बाल गोपाल जी की कृपा से दूर होंगे I आज के दिन सुबह भगवान् शिव को सफेद पुष्प अर्पित करें I ऐसा करने से आपके घर में लक्ष्मी जी का वास होगा I चूँकि आज अघोरी डाकिनी चतुर्दशी भी है तो आज शाम को घर का कोई भी सदस्य एक मुट्ठी पीली सरसों पूरे घर में वारकर घर के बाहर एक कागज़ में रख कर जला दें ऐसा करने से आपके घर में व्याप्त नेगेटिविटी, बुरी आत्मा, आसुरी शक्तियां, भूत- प्रेत आदि बाधा दूर होंगी और घर के वातावरण में शुभता आएगी I ...

astromyntra

आपके आज को श्रेष्ठ बनाने की पूजा-विधि

18 अगस्त 2017 आज भाद्रपद महीने के कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि, आर्द्रा नक्षत्र, वज्र योग, बालव करण और दिन शुक्रवार है I आज अजा एकादशी व्रत और वत्स द्वादशी (पूजा) है I आज तुलसी पत्र और फल से भगवान् कृष्ण जी के चरणों की सेवा करें I ऐसा करने से इस जन्म में जो हमसे अशुभ कर्म हुए हैं और जिसके फलस्वरूप हमें कष्ट-दुर्भाग्य-परेशानियां मिलते हैं उनसे मुक्ति मिल जाएगी I भगवान् कृष्ण जी और बलराम जी के जन्मोत्सव के पावन दिवस चल रहे हैं I आज के दिन बछड़े- बछडियों के द्वारा भगवान् जी का शगुन कराया गया था अर्थात भगवान् जी को नजर दोष से बचाने के लिए उनकी (बछड़े- बछडियों) पूंछ का झाडा लगाया गया था I आज वत्स द्वादशी और शुक्रवार का शुभ मेल है तो आज आप बच्चों के हाथ से या पैसों को हाथ लगवाकर हरा चारा बछड़े-बछडियों को डालें I ऐसा करने से आपके बच्चों को नजर- टोक, आसुरी शक्तियां, चोट आदि सब बुराइयों तकलीफों से बचाव होगा और बड़ों के धन में बरकत होगी I नोट:- यदि आज पूरे दिन का उपवास या विशेष पूजा न कर सकें किन्तु एकादशी के दिन चावल न खाएं इस बात का जरुर ध्यान रखें I वैसे तो चावल महा अन्न है किन्तु सभी बुराईयां, पाप, नेगेटिविटी एकादशी वाले दिन चावल में वास करती हैं इसीलिए चावल या चावल से बनी कोई भी चीज़ बिलकुल न खाएं I ...

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आपके आज को श्रेष्ठ बनाने की पूजा-विधि

आज भाद्रपद महीने के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि, कृत्तिका नक्षत्र, वृद्धि एवं ध्रुव योग, बालव करण और दिन मंगलवार है । आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव (वैष्णव), भारत स्वतन्त्रता दिवस और सर्वार्थ सिद्ध योग है ।  आज के दिन श्रद्धा एवं भाव से कान्हाजी सहित अपने घर के मंदिर के देवताओं की फल, फूल, रोली, मौली, धूप, दीप आदि से पूजा करें ।  आज कान्हाजी का जन्मदिवस है । आज अपने घर के मंदिर की साफ-सफाई और पवित्र कर सजायें और कान्हाजी का स्वागत करें । आज व्रत रखकर शाम के समय कान्हाजी को पंचामृत से स्नान कराएं, शुद्ध एवं स्वच्छ वस्त्र पहनाएं और झूला झुलाकर भोग लगाकर पूजन करें और फिर पंचामृत और भोग आदि को परिवार के सभी सदस्यों में वितरित करें और स्वयं भी ग्रहण करें ।   ...

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जानिए आज का व्रत-पर्व एवं पूजा विधि

7 अगस्त 2017 आज श्रावण महीने के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि, श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग, विष्टि करण और दिन सोमवार है I आज श्रवण पूर्णिमा और रक्षाबंधन है I आज श्रावण पूर्णिमा  और रक्षा बन्धन है रक्षाबंधन का श्रेष्ठतम मुहूर्त शुभ मुर्हत 11:05 AM से 01:30 PM तक। आज के दिन पंचामृत (सब अलग- अलग) दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से भगवान् शिव का अभिषेक करें उसके बाद शुद्ध जल से स्नान करायें फिर 5 अलग- अलग फल अर्पित करके 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मन्त्र का जाप करें इससे श्रावण मॉस में किये गए रोज के अभिषेक, पूजा आदि का पूर्ण फल आपको प्राप्त होगा और भगवान् भोलेनाथ की कृपा आप पर श्रावण मास के वर्षाजल की भांति बरसेगी I आज रक्षाबंधन है, भगवान् भोलेनाथ को राखी समर्पित करें I मधुसूदन परिवार की ओर से हम ये दुआ करते हैं की आपको बताई गयी रोज की पूजा विधि से भगवान् भोलेनाथ की कृपा आने वाले अगले श्रावण मास तक आप पर बनी रहे और आपको जीवन में सुख- समृद्धि, बरकत, उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति हो I ...

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आप के आज को श्रेष्ठ बनाने की पूजा विधि