Swapna Shakun

Swapna    Shakun

जानें क्या है स्वपन और शकुन ?

 

इस संसार में प्राय: सभी मनुष्य स्वप्न देखते हैं I स्वप्न में देखी गयी हर वस्तु, दृश्य, घटना आदि का एक अर्थ अवश्य होता है I प्रकृति के द्वारा उस व्यक्ति विशेष या उससे जुडी हुई चीजों के लिए दिया गया एक संकेत होता है क्योंकि आज हमारे जीवन में जो कुछ भी अच्छी या बुरी घटना घट रही है, जिस सुख- दुःख को हम आज झेल रहे हैं वह उसके केन्द्र बिंदु से आपकी तरफ बहुत समय पहले से ही चल चुकी होती है क्योंकि ये पूरा का पूरा ब्रह्माण्ड एक निश्चित सिद्धांत पर चल रहा है I कार्य और कारण का सिद्धांत हर जगह लागू है अर्थात - आज जो कुछ भी कार्य घटित होता हुआ दिखाई दे रहा है प्रकृति की गोद में उसका कोई ना कोई कारण अवश्य है जैसे एक दिल्ली से चले हुए वाहन का गुडगाँव की तरफ से आ रहे वाहन से बीच मार्ग में टकराव हो गया तो इसमें प्रकृति की तरफ से कार्य- कारण का सिद्धांत जुड़ा हुआ था I वो एक ऐसे निश्चित समय में अपने स्थानों से चले की उस जगह पर एक निश्चित समय में पहुँचने पर दुर्घटना का सामना करना पड़ा I मार्ग में उन दोनों का हजारों वाहनों से सामना हुआ होगा परन्तु टकराव उन दोनों का ही हुआ I यदि उन दोनों के चलने के समय में थोडा सा भी परिवर्तन कर दिया जाता तो यह घटना टल सकती थी I एक मनुष्य जीवन में किन बीमारियों से ग्रस्त होगा ये उसके जीन (Gene) का अध्ययन करके एक वैज्ञानिक उसके जन्म से पूर्व ही बता सकता है और उस जीन के दोषों को दूर करके उस व्यक्ति को रोग मुक्त भी रख सकता है I ऐसे ही एक कुशल ज्योतिषी बच्चे की कुण्डली को देखकर उसके पूर्व जन्म के कर्मों को पहचान कर उसके भविष्य का निर्धारण कर देता है और अच्छे उपायों द्वारा उसको टाला भी जा सकता है I ये सब इसलिए संभव है की आज की घटना आपके पास पहुँचने से अनेकों महीनों कई बार तो अनेकों वर्षों पहले से ही अपनी यात्रा प्रारम्भ कर चुकी है बस सुदूर, अनंत के गर्भ से आने वाली उस अच्छी या बुरी घटना को हमारा अवचेतन मन जोकि अत्यन्त शक्ति से सम्पन्न है हमारे बाह्य मन के सो जाने पर हमें एक दृश्य, प्रतीक आदि के रूप में दिखा देता है बस इसी का नाम स्वप्न है I

प्रकृति एवं हमारे आसपास के वातावरण में घटने वाली वे आकस्मिक घटनाएं जो किसी शुभ- अशुभ घटना की प्रतीक हैं उन्हें शकुन कहा जाता है I सृष्टि की शुरुआत से ही मानव ने अपने आसपास कुदरत और इसके अवयवों जैसे पशु, पक्षी, पेड़- पौधे, अग्नि, जल, वायु, आकाश, स्वयं के अंग विशेष में होने वाली फडकन आदि हलचल, संयोग आदि का अपने जीवन में अच्छा- बुरा प्रभाव बार- बार होते हुए देखा और इसमें अपना विश्वास प्रकट करता चला गया I संसार का कोई ऐसा देश या समाज नहीं है जहां इस प्रकार की मान्यताएं न होँ, जहां शकुन- अपशकुन का विचार न किया जाता हो, संसार के महान, विख्यात एवं सफल लोगों जैसे खिलाडियों, राजनीतिज्ञों आदि को भी देखेंगे तो पायेंगे कि उनके जीवन में भी कुछ धारणाएं, विश्वास, [इन बातों को न मानने वालों की नज़र में अन्धविश्वास (Supersticious)] व्याप्त हैं, जिनके आधार पर वे अपने जीवन को दिशा देते हैं I जिन प्राक्रतिक लक्षणों के सामने आ जाने पर शुभ फल, खुशियाँ प्राप्त होती हैं, उन्हें शुभ शकुन कहा जाता है और जिन चिन्हों के सामने आने पर परेशानियाँ, दुःख, झंझट  उत्पन्न होते हैं उन्हें अपशकुन कहा जाता है I

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10 नवम्बर 2017 आज मार्गशीर्ष महीने के कृष्णपक्ष की सप्तमी तिथि, पुष्य नक्षत्र, शुक्ल योग, बव करण और दिन शुक्रवार है I आज कालभैरवाष्टमी एवं भैरव जयंती है I आज भगवान् महादेव के कष्ट निवारक शत्रुहन्ता, रौद्ररूप काल भैरव जी का जन्मदिवस है. आज संध्या काल में शिवलिंग के आगे या पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से भगवान् काल भैरव प्रसन्न होकर प्रबल शत्रु और महा बाधाओं को शांत कर देते हैं. “ॐ कालभैरवाय नमः” इस मन्त्र का 11 बार उच्चारण करके काजल की डिब्बी को अभिमंत्रित कर लें और फिर इसे बच्चों के माथे पर, पुरुषों के बालों में चोटी के स्थान पर और स्त्रियों के आँखों में लगाने से नजर- टोक आदि तो हटती ही है सफलता और विजय भी प्राप्त होती है. अभिमंत्रित करने की विधि: एक शुद्ध एवं नयी काजल की डिब्बी लें उसको खोलें और काजल की खुली हुई डिब्बी सीधे हाथ में रख लें और डिब्बी को देखते हुए मन्त्र का उच्चारण करें. ...

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